स्वच्छता सर्वेक्षण: भारत के साफ़‑सफ़ाई का असली चेहरा
जब भी टीवी या सोशल मीडिया में ‘स्वच्छता सर्वेक्षण’ की बात आती है, तो कई लोगों को लगता है कि ये सिर्फ सरकार का PR ट्रिक है। लेकिन सच्ची बात ये है – इस रिपोर्ट से हमें पता चलता है कि हमारे शहर कितने साफ़ हैं और किन‑किन चीज़ों पर काम करना बाकी है. अगर आप भी अपने मोहल्ले या शहर की सफाई लेकर जिज्ञासु हैं, तो पढ़िए आगे.
सर्वेक्षण कैसे किया जाता है?
सरकार हर साल अलग‑अलग पैरामीटर सेट करती है – जैसे कूड़ा हटाना, खुले में शौचालय की उपलब्धता, जल निकासी और सार्वजनिक स्थानों की रखरखाव. फिर एक टीम स्थानीय अधिकारियों, NGOs और नागरिकों के साथ मिलकर ग्राउंड‑लेवल चेक करता है। डेटा इकट्ठा करके सॉफ्टवेयर में डालते हैं और स्कोर बनाते हैं। इस प्रक्रिया में GPS टैगिंग, फोटो प्रमाण और जनता की राय भी ली जाती है, इसलिए नंबर सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं.
टॉप 5 शहर और उनके कारण
2024 के सर्वेक्षण में सबसे आगे रहे शहर थे: अमरावती, जयपुर, बेंगलुरु, अहमदाबाद और चेन्नई. इनका स्कोर हाई रहा क्योंकि उन्होंने साफ़‑सफ़ाई के लिए नियमित कचरापेटी उठाने की योजना बनाई, डिजिटल पेटी लागू की और लोगों को जागरूक करने वाले कैंपेन चलाए। उदाहरण के तौर पर अमरावती ने ‘डिजिटल क्लीन अप’ ऐप लॉन्च किया, जिससे नागरिक अपने पड़ोस में गंदगी दिखा सकते हैं और तुरंत सफाई टीम को अलर्ट कर सकते हैं.
दूसरी ओर, कई बड़े शहर पीछे रह गए क्योंकि कचरा इकट्ठा करने के ट्रक देर से आते थे, या खुले में शौचालय अभी भी मौजूद थे. दिल्ली, मुम्बई और कोलकाता जैसी महानगरीय जगहों ने स्कोर गिरते देखे। कारण स्पष्ट है – जनसंख्या घनत्व ज्यादा, बुनियादी ढांचा पुराना और अक्सर कूड़े की निपटान प्रक्रिया में लापरवाही.
अब सवाल उठता है: क्या हम इस रिपोर्ट को सिर्फ पढ़कर छोड़ दें? बिल्कुल नहीं. कई छोटे‑शहरों ने सर्वेक्षण के बाद तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी – जैसे हरियाणा का ‘स्वच्छ गाँव’ मिशन, जहाँ ग्राम पंचायतें मिलकर कचरे की अलगाव योजना बनाती हैं। अगर आप भी अपने इलाके में बदलाव चाहते हैं तो स्थानीय नगरपालिका से संपर्क करके साफ़-सफ़ाई की शिकायत दर्ज करा सकते हैं या स्वयंसेवी समूहों में शामिल हो सकते हैं.
अंत में एक बात याद रखें: स्वच्छता सिर्फ सरकार का काम नहीं, यह हम सबकी ज़िम्मेदारी है. अगर हर घर से कचरे को सही ढंग से फेंका जाए और पड़ोसी की मदद के लिए हाथ बढ़ाया जाए तो हमारे शहर तुरंत बेहतर दिखेंगे. अगली बार जब कोई ‘स्वच्छता सर्वेक्षण’ रिपोर्ट आए, तो इसे एक चेक‑लिस्ट समझिए – क्या आपका क्षेत्र ऊपर है या नीचे? फिर तय कीजिये कि कौन-से कदम उठाने चाहिए.

स्वच्छता में इंदौर की हैट्रिक: आठवीं बार बना भारत का सबसे साफ शहर
इंदौर ने आठवीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर बनने का रिकॉर्ड बनाया है। इस साल उसे नई श्रेणी Super Swachh League में शीर्ष स्थान मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली में यह पुरस्कार प्रदान किया। बड़ी जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में अहमदाबाद नंबर-1 रहा, जबकि भोपाल और लखनऊ भी टॉप-3 में शामिल हैं।
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