नई दिल्ली में बुधवार सुबह एक बेहतरीन राजनीतिक परिदृश्य सामने आया था। जब सात बार इस्तीफे देने वाले या गिराफ़ों की कुर्सी पर खड़े होने वाले नहीं थे, तो वहां मौजूद लोग अपने आप को एक साथ देख रहे थे। यह कोई आम दिनों की बात नहीं थी; 27 जनवरी, 2026 की सुबह ढाई घंटे के लिए देश के मुख्य नौकरशाह और विपक्षी नेता संसद भवन के मुख्य समिति कमरे में मिले। यहाँ भारतीय नेशनल कांग्रेस से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक, और उसके बीच की छोटी पार्टियों तक सबके प्रतिनिधि थे। इस बैठक का उद्देश्य साफ़ था: आगे चल रहे बजट सत्र को बिना किसी हंगामे के पूरा करना।
किरें रिजिजू केंद्र सरकार के संसदीय कार्य मंत्री द्वारा अध्यक्षता की गई इस बैठक का समय सुबह 11 बजे निर्धारित था। यह बैठक उस प्रमुख घटना से ठीक एक दिन पहले आयोजित की गई थी, जिसका नाम 2026-27 संसदीय बजट सत्रनई दिल्ली था। इसमें 26 से ज्यादा बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों के फ्लोर लीडर्स ने हिस्सा लिया। अगर आपको लग रहा है कि यह सिर्फ एक औपचारिकता थी, तो आप गलत हैं।
विपक्ष और सरकार के बीच तन्मंत्र
सुबह की बैठक का माहौल शुरुआत में कुछ तनावपूर्ण जरूर था। विपक्षी नेताओं की ओर से जाइराम रमेश, प्रमोड तिवारी और मैथिली टगोर जैसे चेहरे वहां मौजूद थे। उन्होंने लगातार कहा कि विधानमंडलीय कार्यवाही में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए। इसके जवाब में सरकार ने यह स्पष्ट किया कि उनकी मांगें तभी पूरी होंगी जब संसद चलने में कोई बाधा न आए।
सामाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव और तृणाمول कांग्रेस के शतब्दी राय भी वहां मौजूद थे। ये लोग अक्सर संसद की बैठकों में असहमति के पक्ष में होते हैं, लेकिन इस अवसर पर उन्होंने सहयोग की बात कही। बीजु जनता दल के डॉ. ससमिट पात्रा और एआईएडीएमके के एम. थम्बिदुराइ ने भी अपने-अपने अनुभव बताए। यह दिलचस्प था क्योंकि अक्सर इन पार्टियों के बीच भी मतभेद होते हैं, लेकिन 27 जनवरी को उन्होंने एक मंच पर अपना विरोध या सहयोग दोनों ही रूपों में व्यक्त किए।
राहुल सिंह के घर पर शाम का अलग इंतजाम
उधर, वही दिन जो सबकी ध्यान में था, उसी शाम 4 बजे एक अलग तरह की बैठक तय हुई। यह बैठक राजनाथ सिंह भारतीय जनता पार्टी के निवास पर हुई। इसमें शामिल थे अमित शाह, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा, और व्यापार मंत्री पीयूष गोयल। यह बैठक उन संभावित चुनौतियों पर चर्चा के लिए थी जो सदन में आ सकती हैं।
यह दो अलग-अलग बैठकें क्या बोल रही हैं? सरल शब्दों में कहें तो, एक बैठक यह बताने के लिए थी कि "हम सबको एक साथ काम करना है", और दूसरी यह तय करने के लिए थी कि "अगर विवाद हुआ तो हम क्या करेंगे"। सरकार ने इसे अपनी रणनीति का हिस्सा बना लिया है ताकि 28 जनवरी से शुरू होने वाले सत्र में कोई हास्यास्पद स्थिति न पैदा हो।
बजट सत्र का शेड्यूल और महत्व
यह सत्र सिर्फ 30 बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो चरणों में बंटा है। पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल, 2026 तक होगा। यह एक लंबा समयखंड है जहां कई बिल लाए जाएंगे और उन पर चर्चा होगी। सबसे बड़ा आकर्षण फिर भी 1 फरवरी की तारीख है।
निर्मला सीतारामन केंद्रीय सरकार इसी दिन केंद्रीय बजट रखेंगी। यह उनकी लगातार नौवीं बार पूर्ण बजट प्रस्तुति होगी। आर्थिक सर्वेक्षण 28 जनवरी की पहली ही बैठक में रखा जाएगा, जबकि प्रधानाध्यक्ष द्रौपदी मुर्मू का संसद के दोनों सदनों को संबोधन भी उसी दिन होगा।
राजनीतिक गणित और भविष्य
विपक्ष के लिए यह अवसर भी मौका है और चुनौती भी। उन्हें यह दिखाते हुए देखा जा रहा है कि वे लोकतंत्र की रक्षा कैसे करते हैं। दूसरी तरफ, सरकार को यह दिखाते हुए देखा जा रहा है कि वे विकास के लिए संसद को कैसे काम में लाते हैं। यदि यह बैठक सफल होती है, तो संसद के इतिहास में इस वर्ष को एक मील का पत्थर माना जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
संसदीय बजट सत्र किस दिन शुरू होगा?
संसद का बजट सत्र 28 जनवरी 2026 से शुरू होगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के बाद सदन के दोनों सदनों में काम शुरू होगा।
क्या सभी पार्टियों ने इस मीटिंग में हिस्सा लिया?
जी हाँ, इस बैठक में 26 से अधिक पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें कांग्रेस, तृणमूल, समाजवादी पार्टी और बीजु जनता दल जैसे प्रमुख दलों के नेता शामिल थे।
बजत कब पेश किया जाएगा?
बजट 1 फरवरी 2026 को पेश किया जाएगा। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन द्वारा लगातार नौवीं बार पूर्ण बजट प्रस्तुति होगी।
सभी दलों की बैठक क्यों आयोजित की गई थी?
यह बैठक सत्र के दौरान संसद के शांतिपूर्ण संचालन और विधायी कार्यवाही में सहयोग सुनिश्चित करने के लिए आयोजित की गई थी।
Jamal Baksh
मार्च 26, 2026 at 08:46 पूर्वाह्न
यह बहुत ही सकारात्मक कदम है कि सभी पक्षों ने संसदीय कार्य की गंभीरता को समझा है। जब देश के अलग-अलग विचारधारा वाले लोग एक ही मेज पर बैठते हैं तो असल में लोकतंत्र जीवंत होता है। मुझे उम्मीद है कि इस बार बजट सत्र में भी वही माहौल बना रहेगा जिसमें विकास और प्रतिनिधित्व दोनों को महत्व मिलेगा। राजनीति में समय की भावना होना ज़रूरी है ताकि जनता की आवाज़ ऊपर तक जा सके।