दरभंगा में 2500 विद्यालयों में होगी अभिभावक-शिक्षक सभा

बिहार के दरभंगा जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बिहार सरकार ने जिले भर के 2500 से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में एक साथ अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (PTM) आयोजित करने का निर्देश दिया है। यह कड़ी प्रयास 9 मई को किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य घर और स्कूल के बीच के अंतर को कम करना और बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है।

आमतौर पर PTM एक औपचारिकता बन चुकी है, लेकिन इस बार जिला प्रशासन इसे गंभीरता से ले रहा है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संगोष्ठी का थीम "हमारा बच्चा, हमारी जिम्मेदारी" रखा गया है। इसका तात्पर्य स्पष्ट है: शिक्षा अब केवल स्कूल की दीवारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी इसमें अनिवार्य होगी।

संगोष्ठी का मकसद और रूपरेखा

इस विशाल स्तर की बैठक का आयोजन इसलिए किया जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति और शैक्षिक प्रगति में चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है। दरभंगा जिले में हजारों गांव हैं, और कई बार अभिभावक स्कूल के कामकाज से अनभिज्ञ रहते हैं। इस संगोष्ठी के माध्यम से शिक्षकों को अभिभावकों से सीधे संवाद करने का मौका मिलेगा।

रीपोर्ट के मुताबिक, इस दिन शिक्षक न केवल बच्चों की पढ़ाई की रिपोर्ट देंगे, बल्कि उनके स्वास्थ्य और व्यवहार पर भी चर्चा करेंगे। विशेष ध्यान उन बच्चों पर दिया जाएगा जो स्कूल नियमित रूप से नहीं आ पाते हैं। अभिभावकों को समझाया जाएगा कि घर पर पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण बनाना उनकी पहली जिम्मेदारी है। जब बच्चा आत्मविश्वास के साथ स्कूल आएगा, तो ही वह सीखने की प्रक्रिया में पूरी तरह शामिल हो पाएगा।

अभिभावकों की भूमिका और चुनौतियां

हरियाणा या महाराष्ट्र जैसे राज्यों में शिक्षा में अभिभावक सहभागिता की अच्छी उदाहरण मिलती हैं, लेकिन बिहार में अभी भी बहुत सारे अभिभावक मानते हैं कि पढ़ाई सिर्फ स्कूल का काम है। इस सोच को बदलना इस संगोष्ठी की सबसे बड़ी चुनौती है।

स्थानीय शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब अभिभावक स्कूल आते हैं, तो उन्हें लगता है कि उनका बच्चा महत्वपूर्ण है। यह मनोवैज्ञानिक प्रभाव बच्चे के प्रदर्शन पर सकारात्मक असर डालता है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह रुझान बना रहेगा? क्या यह केवल एक दिवसीय कार्यक्रम होगा या इसके दीर्घकालिक परिणाम होंगे?

राज्य स्तर पर अन्य पहलें

दरभंगा की इस पहल के साथ-साथ, राज्य स्तर पर भी शिक्षा गुणवत्ता सुधार के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। 'टीचर्स ऑफ बिहार' नामक एक मंच ने हाल ही में मार्च 2026 में होने वाली एक और बड़ी अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी की घोषणा की थी, जिसका थीम "प्रवेश से प्रगति तक" था। उस कार्यक्रम का लक्ष्य छात्रों की प्रगति रिपोर्ट साझा करना और अभिभावकों से सुझाव लेकर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना था।

हालांकि, दरभंगा की 9 मई की यह बैठक और राज्य स्तर की अप्रैल-मार्च की योजनाओं के बीच कोई सीधा संस्थागत संबंध अभी स्पष्ट नहीं है। फिर भी, दोनों ही पहलों का मूल उद्देश्य एक ही है: शिक्षा में पारदर्शिता और सहयोग बढ़ाना।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. रामेश्वर प्रसाद (नाम बदला गया है) का मानना है कि "स्कूल और घर के बीच की खाई को पाटना जरूरी है। जब अभिभावक जानते हैं कि उनका बच्चा कहां खड़ा है, तो वे उसे बेहतर मार्गदर्शन दे सकते हैं।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ये बैठकें केवल कागजी कार्रवाई बन गईं, तो इससे शिक्षा व्यवस्था पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार में प्राथमिक स्तर पर छात्रों की उपस्थिति अक्सर 70% से नीचे रह जाती है, जबकि राष्ट्रीय औसत 85% के आसपास है। दरभंगा जिले में यह स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ दूरदराज के क्षेत्रों में स्कूल पहुंचना कठिन होता है। इसीलिए इस संगोष्ठी को सफल बनाना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ा परीक्षा है।

आगे क्या होगा?

9 मई के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी इन बैठकों की रिपोर्ट का विश्लेषण करेंगे। उन स्कूलों की पहचान की जाएगी जहां अभिभावकों की उपस्थिति कम रही है, और वहां अलग से बैठकें बुलाई जा सकती हैं। सरकार की उम्मीद है कि इससे अगले सत्र में छात्रों की उपस्थिति में 10-15% की वृद्धि होगी।

Frequently Asked Questions

दरभंगा में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी कब और कहाँ होगी?

यह संगोष्ठी 9 मई को दरभंगा जिले के सभी 2500 से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में एक साथ आयोजित की जाएगी। हर विद्यालय अपने समयानुसार अभिभावकों को आमंत्रित करेगा।

इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य क्या है?

मुख्य उद्देश्य "हमारा बच्चा, हमारी जिम्मेदारी" के तहत स्कूल और अभिभावकों के बीच सहयोग बढ़ाना है। इसमें बच्चों की नियमित उपस्थिति, स्वास्थ्य और घर पर पढ़ाई के वातावरण पर चर्चा की जाएगी।

क्या सभी सरकारी स्कूल इसमें शामिल होंगे?

हाँ, जिले के सभी सरकारी प्राथमिक विद्यालय इस पहल में शामिल हैं। यह एक व्यापक प्रयास है ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के बच्चों को लाभ मिल सके।

अभिभावकों को इस बैठक में क्या पूछा जाएगा?

अभिभावकों से उनके बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और घर पर अध्ययन के लिए सही माहौल बनाने के बारे में बातचीत की जाएगी। साथ ही, बच्चों की प्रगति रिपोर्ट साझा की जाएगी।

क्या यह कार्यक्रम राज्य सरकार की नीति का हिस्सा है?

हाँ, यह बिहार सरकार की शिक्षा गुणवत्ता सुधार की नीतियों के अनुरूप है। हाल ही में राज्य स्तर पर भी ऐसी ही बैठकों की घोषणा हुई है, जिससे स्पष्ट होता है कि शिक्षा में अभिभावक सहभागिता पर जोर दिया जा रहा है।